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Saturday, 13 May 2017

Plastic Eating Worm Discovered || प्लास्टिक खाउ कीडे खोजे गए...

वैज्ञानिको ने प्लास्टिक खाने वाले एक कीडे /worm की खोज की है ।


QUARTZ 24 APRIL, 2017

ज्यादातर ये कीडा मछ्ली पकडने के चारे की तौर पर उपयोग होता है । ये कीडा मधुमख्खी के छ्त्ते का मॉम खाते है ।⅄

स्पेन के वैज्ञानिक फेडेरिक बेर्टोसीनी (Institute of Biomedicine and Biotechnology of Cantabria, Spain)ने सब से पहले इन कीडो की प्लास्टिक खाने की आदत को खोज था ।


ज्यादातर होतो है वैसे ही ये खोज एक अकस्मात का कारण हुइ । फेडरिक अपने घर पे रखे मधुमख्खी के छत्ते में से ये कीडे साफ कर रहे थे । उन्हों ने इन कीडों को एक प्लास्टिक बेग में भर दिया । लेकिन ये कीडे उस बेग में से छेद करके निकल गए ।

इस घटना पर खोज करते हुए 24 April, 2017 को उन्हों ने एक खोज पत्र "Current Biology" में प्रदर्शित किया है । इनके मुताबिक, 100 कीडे /wax worms एक पोलिथिन शोपिंग बेग को 40 मिनीट में खा सकते है । ज्यादातर खुले वातावरण में ये प्लास्टिक बेग को पूर्ण विघटित होने में 100 से 400 साल लगते है । जब की ये कीडे महज 40 मिनीट में उसे विघटित कर देते है ।


2011 में एक फूग/fungi की प्रजाति खोजी गई है, 2014 एक बैक्टेरिया की प्रजाति खोजी गई है । जो प्लास्टिक को विघटित कर सकती है । लेकिन ये कीडे इन सब से जल्दी प्लास्टिक को पचा सकते है । समस्या ये है की, ये कीडे जमीन मे अंदर फसे प्लास्टिक को खा नहीं सकते । जमीने के नीचे ऑक्सिजन स्तर कम है ।

लेकिन वैज्ञानिको ने इस का हल निकाल दिया है । ये कीडा जिस उत्सेचक /enzyme की मदद से प्लास्टिक को पचाता है, वैज्ञानिक उस उत्सेचक को लेबोरेटरी में बनाने की कोशिश करेंगे ।

कुछ सालों पहले, भारत में सुप्रिम कोर्ट ने कहा था, "हम प्लास्टिक टाईम बोम्ब पर बैठे है ।" 

एक सर्वे के मुताबिक, भारत में  60 बडे शहरों में हर रोज 15,000 टन प्लास्टिक का कूडा पैदा होता है । इस में ज्यादातर प्लास्टिक का पुन:उपयोग या रिसायक्लींग नहिं होता है । या तो ये जमीन में पडा रहता है या पानी के स्तोत्रो को प्रदुषित करता है ।

अब ये स्पेनीश वैज्ञानिक की खोज शायद प्लास्टिक प्रदूषण में मुक्ति दिला सकें । 

Tuesday, 17 June 2014

100 साल बाद 30,000 फूल खिलेंगे

युं तो हर साल फूल खिलते है लेकिन कुछ पौधो में यह प्रक्रिया बहुत धीमे शुरु होती है ।

US बोटोनिकल बगीचे में "क्वीन ऑफ एन्डिझ" पौधा करीब 100 साल बाद खिलेगा ।उसका फूल पैदा करने का प्रदंड 30 फूट लंबा है, जिस पर करीब 30,000 फूल खिलेंगे ।इस तरह के पौधे अमेरीका में स्थित एंडिझ के पर्वतीय विस्तारों में ही मिलते है ।

1990 में लॉरी डोर, "क्वीन ऑफ एन्डिझ" के बीज लाए थे । जिसको US बोटोनिकल बगीचे में बोया गया था । करीब 23 साल के बाद इस पौधे पर कलीयाँ खीलने की शुरूआत हुई है । एक बार फूल खिलने के बाद यह पौधा मुरझा जाता है । इस फूल को खिलते देखने के लिए वनस्पतिप्रेमी उत्सुक है ।

गिनीश बुक ऑफ वर्ल्ड रॅकोर्ड में "सबसे धीरे फूल पैदा करनेवाली प्रजाति" का रॅकॉर्ड इस पौधे के नाम है । गिनीश बुक के मुताबिक इस पौधे पर 150 साल बाद फूल खिलते है ।

Wednesday, 4 June 2014

Blonde or Brunette : "बाल की खाल" बदलें...

source : times of  india, sciencedaily.org
एक संशोधन से पता चला है की, हमारे बालों का रंग सुनहरा पीला (blonde) या काला ब्राउन (brunette) हमारे जिनेटीक कॉड के एक अक्षर के परिवर्तन से बदला जा सकेगा।
केट पेरी -hollywood


संशोधक डेविड किंगस्ले (Howard Hughes Medical Institute-HHMI)ने मछलीयो की त्वचा, बाल, आँख के रंग के लक्षणों को नियंत्रण करने वाले जिनेटीक कॉड का पता लगा लिया है । डेविड ने इस प्रकार का संशोधन मनुष्य के जनीनिक बंधारण पर भी किया है ।



रंग बदलना कैसे संभव होगा ?

संशोधक डेविड किंगस्ले इस संशोधन को समझते हुए कहते है," मनुष्य के बाल का रंग सुनहरा पीला (blonde) या काला ब्राउन (brunette) होन या इसकी आंख के रंग में विविधता "रंग लक्षण" (pigment trait) के जिनेटिक कॉड  की विशेषता है। निश्चित जिनेटीक कॉड मानव जाति में खास लक्षण (trait) प्रदर्शित करता है । अगर जिनेटीक कॉड में थोडा भी बदलाव करे तो मनुष्य जाति में नया लक्षण प्रदर्शित होगा।"

अपनी बात को समजाते हुए डेविड बताते है की, "उत्तरीय युरोप के लोगों में सुनहरे पीले (blonde) बाल का लक्षण (trait) ज्यादा देखने को मिलता है । उनके DNA कॉड में KITLG प्रोटीन का कॉड इस लक्षण (trait) का नियंत्रण करता है ।


मनुष्य कें 23 जोड रंगसूत्रो में 12 नंबर की जोड के रंगसूत्र के KITLG प्रोटीन कॉड में बदलाव करके ब्राउन काले (brunette) बाल का लक्षण (trait) प्रदर्शित किया जा सकता है ।

KITLG प्रोटीन कॉड की शृंखला में  3,50,000 न्युक्लियोटाइड दूर एक न्युक्लियोटाइड में ऐडेनीन (Adenine) की जगह गुआनीन (guianine) दाखिल करने से ब्राउन काले (brunette) बाल का लक्षण (trait) 20% प्रदर्शित हो सकता है । "


यह बदलाव छोटा है लेकिन जीव विज्ञान के क्षेत्र में यह एक बडी उपलब्धी है । इस प्रकार के जिनेटीक कॉड बदलाव के प्रयोग चूहों पर किए गये है । जिनमें प्रयोगो में कुछ सफलता मिली है ।

Boundry :
कोलेजीयन कन्या बोलेगी "डोक्टर साहब ! प्लीज मेरे बाल पिन्क कलर के कर दो ! यह रहा मेरे जिनेटीक बायोडेटा...."

(यहां प्रदर्शित फोटो में कलाकारों के बाल "कलर डाई" किए हुए है ।)

Friday, 30 May 2014

CUT, COPY & PASTE BY “ HIV VIRUS” : HIV वायरस से “कट, कोपी & पेस्ट”

Source : sciencedaily.org, eLIFE journal
आर्हेनियस इन्स्टियूट के बायोमिडीसीन विभाग के संशोधको ने HIV वायरस से हमारे जनीनिक बंधारण में सुधार करने की टेक्नीक खोजी है । इससे हमारे जनीनिक बंधारण की त्रुटीयों को सुधारा जा सकता है । जिससे आनुवंशिक रोगो के इलाज में एक नई राह खुल गई है ।

पहले जनीनिक बंधारण में सुधार करने के लिए ई. कोली बैक्टेरीया का उपयोग होता था । लेकिन इस पध्ध्ति से जनीनिक शृंख्ला को इच्छित जगह से काटा नहीं जा सकता था । इसलिए जनीनिक बंधारण सुधार में इच्छित परीणाम नहीं मिलते थे ।
HIV वायरस
HIV वायरस अपने जनीनों को हमारे कोषो के जनीन बंधारण में दाखिल कर देते है । जिससे यह कोष अब वायरस के जनीन कॉड के अनुसार काम करने लगता है । इसी कार्यप्रणाली को ध्यान में रखते हुए  वैज्ञानिकोंने  HIV वायरस के नेनो अणुओं का उपयोग जनीन बंधारण में इच्छित सुधार करने के लिए किया । लेबोरेटरी में संवर्धित निश्चित जनीन बंधारणवाले HIV वायरस हमारे कोषो के जनीन कॉड को काटने (cut) और नये जनीन कॉड को दाखिल करने (paste) का काम करेंगे ।

इस पध्धति से HIV वायरस का उपयोग AIDS रोग की बिमारी के इलाज में इस्तमाल किया जा सकता है । इस प्रकार हमारे जनीनिक बंधारण में सुधार कर AIDS रोग के प्रति रोगप्रतिकार तंत्र मजबूत किया जा सकता है ।

Monday, 26 May 2014

10 New Species of 2014 (part 2) : 2014 में खोजे गई 10 नई सजीव जाति

 ( wait....wait ...please...it takes time to load 5 images)
(6) पश्चिमी ओस्ट्रेलिया के बरसाती जंगलो की छिपकली (Saltuarius eximius) - इसकी पूंछ फैली हुई होती है और उसके रंग की वजह से इन छिपकलीयों को आसानी से देखा नहीं जा सकता ।

(7) स्पेन के दक्षिणी समुद्र में पानी के नीचे गुफा में पाया गया एक कोषी जीव (protista) - जो बहुकोषी स्पोंज की नकल जैसा लगता है |


(8) स्पेश क्राफ्ट जहां पे बनते है वहां की फर्श पर पेदा होते हुए बैक्टेरिया की नई जाति (Tersicoccus phoenicis) यह संभव है, यह जाती स्पेश फ्राफ्ट के साथ अंतरिक्ष में भी पहोंच चुकी हो!

(9) कोस्टो रिको के जंगलो से मिली बेहद छोटी मधु मख्खी की जाति (Tinkerbella nana) इस मधुमख्खी की लंबाई 0.00984 ईंच है । यह अपने अंडे दुसरे किटकों के अ‍ॅंडो में छुपा देते है ।

(10) पश्चिमी क्रशिया के ल्युकिना जामा-ट्रोजामा गुफा में 3000 फीट जमीन के नीचे अंधी स्नेल (Zospeum tholossum) की जाती मिली है । जो 0.08 ईंच लंबी है । स्नेल की सामान्य जातियों के मुकाबले यह धीरे चलती है । एक सप्ताह में करीब 1 ईंच से भी कम !

Sunday, 25 May 2014

10 New Species of 2014 (part 1) : 2014 में खोजे गई 10 नई सजीव जाति

(1) इक्वाडोर का 'cute' ओलिंग्योटो
 (Bassaricyon neblina) यह 35 साल में सस्तन समुदाय में खोजी गई पहली नयी जाति है ।

(2) थाइलेन्ड का क्वीसाक ड्रेगन पेड ((Dracaena kaweesakii)) यह पेड 40 फीट ऊँचा है ।

(3) एंटाकर्टिका का एनड्रिल ऐनामोन यह 1 ईंच से छोटा सजीव अपना शरीर बर्फ में दबा के रखता है । आमतौर यह सजीव समुद्र पानी में ही पाए जाते है । एंटाकर्टिका में यह पहली बार पाए गए है ।

(4) सांटा कटलिना की गुफाओ से मिला दिखने में भयानक दिखनेवाला केकडा (Liropus minusculus) का कंकाल, इस जाती की मादा की लंबाई 1 ईंच का 1/10 और नर की लंबाई 1/8 होती है ।
(5) नारंगी पेनिसिलीयम फूग -

⇒⇒Remaining 5 will published soon... keep watching....

Saturday, 17 May 2014

आर्जेन्टिना में से महाकाय (gaint) डायनासोर के अस्थि मिले

Source : BBC News
आर्जेन्टिना में पेन्टागोनिया के पश्विम में स्थित 'ला फ्लेन्चा' के रेगीस्तान से महाकाय डायनोसोर के  अश्मिभूत अस्थि मिले है।


इस डायनोसौर के कुल्हे की हड्डी के (thigh bone) माप से यह अंदाजा लगाया जाता है की, यह डायनोसोर 40 मिटर(13 फूट) लंबा और 20 मिटर (65 फूट) ऊंचा होगा। इस हिसाब से उसका वजन 77 टन (14 आफ्रिकन हाथी जितना!!) होगा । यह उस वक्त का सबसे महाकाय डायनोसोर हो सकता है।

वैज्ञानिको का मानाना है की, ये टिटानोसौर (titanosaur) की नयी जाति हो सकती है । इस जाति के डायनोसौर वनस्पतिहारी (herbivore) थे ।

Thursday, 15 May 2014

Dancing Frogs Found in India : "नृत्य करने वाले मेढक"


 new dancing frogs, Micrixalus kottigeharensis.
Source : Times of India
भारत के पश्चिमी जंगलो से "Dancing Frog" (नृत्य करनेवाले मेढक) की एक जाति मिली है। इस जाति के 14 मेढक मिले है।

"Dancing Frog" जाति के नर प्रणय मिलन के समय अपने पैरो को उपर-नीचे करते हुए अजीब सा नृत्य करता है। ये जाति के मेढक बहोत छोटे होते है। उनकी लंबाई 13-35 मिलीमीटर (एक मक्खि जितना !!) जितनी ही होती है। प्रो. सत्यभामा दास बिजु (मुख खोजकर्ता, दिल्ही युनिवर्सिटी) के नेतृत्व में "Dancing Frog" की खोज पीछले एक दशक से पश्विम घाट की पर्वतमाला में हो रही थी।
Dancing Frog
प्रो. सत्यभामादास बिजु इस मेढक की बारे में कहते है-,
" तेज बहने वाले झरने, Dancing Frog का बहुत छोटा कद- कारणों से यह मेढक जल्दी से नजर नहीं आ सकते ।यह जाति के नर मेढक प्रणय मिलन के समय अपना पिछला पैर उठाके हवामें लहराता है। इस जाति की मादा का बर्ताव भी अजीब पाया गया है। वो अपने अंडे उथले पानी के एक गढ्ढे में रख के उपर मिट्टी और पथ्थर ढँक देती है।"
Dancing Frog के DNA से पता चलता है की इनका अस्तित्व डाईनासोर के जमाने से भारत में है।
प्रो. सत्यभामा दास बिजु आगे कहते है-,
प्रो. सत्यभामादास बिजु
"जंगल में झरने के बहते पानी के तेज शोर की वजह से इन मेढको ने मादा को आकर्षित करने का यह तरीका ईजाद किया होगा। लेकिन मादा का अपने अंडो को रखने के लिए घोसला बनाना (गढ्ढा बनाना) अजीब बर्ताव है।"

प्रो. सत्यभामादास बिजु भारत के "मेढक मेन" (Frog man of India) नाम से जाने जाते है। उनके नाम कई खोजें दर्ज है। जिनमें "Purple Frog" (बैंगनी मेढ्क) भी है।
उनका मानना है की पर्यावरण में परिवर्तन और आवास की कमी के कारण Dancing Frog की जाति अब नाशप्राय: हो रही है।

शायद, इस जाति का पृथ्वी पर  यह आखरी नृत्य हो सकता है !!!!

HAPPY MOTHER'S DAY : मधर डॅ का इतिहास जाने

मधर डॅ का इतिहास :- प्राचीन समय में ग्रीकवासी क्रोनस की पत्नी और समग्र देवताओं की माता "रिहा" (Rhea)‌ को आदर देने के लिए मधर ड...