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Tuesday, 20 May 2014

After 80 years "Light turns into Matter" : प्रकाश का पदार्थ में रुपांतर संभव हुआ...80 साल बाद

source : Times of India


जी. ब्रेईट और जॉन ऐ व्हिलर ने प्रकाश का द्रव्य में रूपांतर करने का सिद्धांत 1934 में दिया था।

"प्रकाश के दो कण (फोटोन) को एक दुसरे से टकराया जाए तो उनका इलेक्ट्रोन और पोझिट्रोन में रुपांतर हो जाएगा।"
लेकिन, इसका प्रायोगिक तौर पर कभी पृथक्करण नहीं हो सका। इस प्रयोग को संपन्न करने के शक्तिशाली कण प्रवेगक (पार्टिकल एक्लेरेटर) चाहिए।

2014 में लंडन में स्थित इम्पेरियल कोलेज की 'ब्लेकेट फिजिक्स लेबोरेटरी' में यह प्रयोग किया गया है। इससे जी. ब्रेईट और जॉन ऐ व्हिलर के सिद्धांत को अनुमोदन मिला है।

प्रयोग का महत्व:

इस प्रयोग से ब्रह्मांड की उत्पत्ति के शुरूआत के 100 सेकन्डस का चित्र स्पष्ट किया जा सकेगा। बिग बेंग के बाद कैसे यह द्रव्य स्वरूप ब्रह्मांड बना ? इस प्रश्न का उत्तर यह प्रयोग दे पायेगा।

प्रयोग कैसे किया गया ?

प्रथम  चरण :
वैज्ञानिको ने  शक्तिशाली लेसर किरणों से इलेक्ट्रोन्स को प्रकाश गति (3× 108 m/s) के जितना प्रवेगित किया । इन इलेक्ट्रोन्स को सोने (Au, Gold) पर फेंका गया । जिससे अति शक्तिशाली फोटोन (हमारे दृश्यप्रकाश से लाखो गुना!!) का बीम मिलता है ।

द्वितीय चरण:
अब सोने (Au, Gold) के प्याले जैसे पात्र में अंदर की ओर -Hohlraum (German शब्द, 'गुहा')- शक्तिशाली लेसर बीम फेंका जाता है। जिससे तारों में बनता है वैसा ही 'उष्मीय क्षेत्र' बनता है। जिसमें से भी फोटोन निकलते है।(जैसे गरम लोहों से लाल प्रकाश निकलता है!!)

पहेले चरण के फोटोन को इन दूसरे चरण के फोटोन की दिशा में भेजा जाता है । दोनों के टकराने  से इलेक्ट्रोन और पोझिट्रोन पेदा होते है।

प्रो. स्टीव रोझ (इम्पेरियल कोलेज, लंडन) ने बताया की- 'इस प्रयोग से 80 साल पहेले के सिद्धांत को प्रायोगिक सहमति मिली है।  और उच्च ऊर्जा वाले भौतिक प्रयोगो के लिए नई दिशा खुल गई है।'

Sunday, 4 May 2014

आवर्त कोष्टक में एक नया तत्व-117 सामिल होगा

आवर्त  कोष्टक में एक नया, सुपर भारी तत्व-117 सामिल होगा ।

Source : Times of India
भारत तथा ऑस्ट्रेलिया , फिनलैंड , जर्मनी , जापान , नार्वे, पोलैंड , स्वीडन , स्विट्जरलैंड , ब्रिटेन और अमेरिका में 16 संस्थाओं से 72 वैज्ञानिकों और इंजीनियर ने मिलकर 18 महीने के लंबे अभियान के बाद यह नयें तत्व का उत्पादन किया है।

नया तत्व-117, सीसा(Pb) के एक परमाणु की तुलना में 40% भारी हैं।

जर्मनी स्थित GSI accelerator laboratory ने नये तत्व-117 के क्षयन गुणधर्म(decay property) को मापा है। जिससे इस नये तत्व के अस्तित्व होने के आसार मजबूत हुए है।

आम तौर पर परमाणु संख्या -92 (युरेनियम) के बाद के तत्व अस्थायी होते है। इन तत्वो का अर्ध आयुष्य समय (t1/2) भी बहुत कम होता है। जिससे इन तत्वो संश्लेषण संभव नही होता। लेकिन, नया तत्व-117 का अर्ध आयुष्य समय (t1/2), इन कृत्रिम तत्वो से काफी लंबा है ।

परमाणु संख्या 117 के  तत्व की खोज के बारे में प्रारंभिक रिपोर्ट 2010 में जारी किए गए थे। नए तत्व 117 के संश्लेषण के लिए  विशेष बर्कीलियम(Bk) लक्ष्य सामग्री आवश्यक है।

प्रोफेसर होर्स्ट स्टोकर , (GSI, वैज्ञानिक निदेशक) ने कहा," तत्व 117 पर सफल प्रयोगों, 'island of stability' (स्थिरता का द्वीप) पर स्थित super-heavy elements (सुपर भारी तत्वों) तत्वों के उत्पादन और पता लगाने के लिए रास्ते पर एक महत्वपूर्ण कदम है । "

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