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Thursday, 25 May 2017

Self Cleaning Clothes…'स्वयं साफ होनेवाले कपडें...

Self Cleaning Clothes…'स्वयं साफ होनेवाले कपडें...


एक नूर आदमी... हजार नूर कपडे...

कपडे हर एक के व्यक्ति के स्वभाव का आइना है । हम नए कपडे पहन के अपने आप को उर्जावान और आकर्षक समझते है । लेकिन ये कपडे हर दो-चार दिन में मैले हो जाते है । उन्हें धोना पडता । लेकिन, जल्द ही हमें ये झंझट से मुक्ति मिल जाएगी । क्योंकी..... वैज्ञानिकोंने ऐसे कपडे ढूंढ निकाले है । जो अपने आप ही साफ़ हो जाएगें । भारत के ARCI(International Advanced Research Centre for Powder Metallurgy, Hydrabad) के वैज्ञानिकोने इस पर शोध करते हुए ऐसे कपडे बनाए है जो सूर्य प्रकाश में अपने आप साफ हो जाएगें । ये संभव हुआ है नेनो टेक्नोलोजी के कारण !

स्वयं साफ होनेवाले कपडों के रेशों पर TiO2 या ZnO के नेनो कणों का पड चढाया जाता है। TiO2 (टिटेनियम ऑक्साइड) एक शक्तिशाली प्रकाश क्रियाशिल उत्प्रेरक/photocatalyst है | जब कपडें को सूर्य प्रकाश में रखते है तब TiO2 के साथ प्रकाश रासायणिक क्रिया होने से हाइड्रोक्सील मुक्तमुलक/OH· और ऑक्सिजन/O2· मुक्तमुलक बनता है । कपडें पर जमा हुआ मैल, पसीना, धूल-मिट्टी, बैक्टेरिया आदि (कार्बनिक पदार्थ) इनके साथ मिलकर कार्बन डायोक्साइड/CO2 और पानी/H2O के स्वरुप में सतह से दूर हो जाते है । इस प्रकार कपडें की सतह से अपने आप दाग‌-धब्बें दूर हो जाएगें।
'स्वयं साफ होने वाले कपडों' के रेशों पर TiO2 या ZnO के नेनो कणों का पड होने के कारण ये कपडें पानी प्रतिरोधी/water resistant होते है ।  इन कपडों में नेनो सिल्वर के उपयोग से ये कपडे एन्टिबैक्टेरियल हो जाते है ।

रासायणिक प्रक्रिया :

जब सूर्यप्रकाश TiO2 पर पडता है तब इलेक्ट्रोन्स उसके संयोजकता पट/valance band से कूदके वाहकता पट/conduction band में आ जाते है । TiO2  की सतह पर एसे कई इलेक्ट्रोन्स और उसके छिद्र बन जाते है । O–2 और इलेक्ट्रोन्स से जुडकर ऑक्सिजन वायु/O2· मुक्तमुलक बनाते है । इलेक्ट्रोन्स के छिद्र, पानी/H2O के साथ मिलकर हाइड्रोक्सील मुक्तमुलक/OH· बनाते है । ये दोनों मुक्तमुलक अतिक्रियाशिल होने के कारण तुरंत मैल, पसीना, धूल-मिट्टी, बैक्टेरिया आदि (कार्बनिक पदार्थ) साथ मिलकर कार्बन डायोक्साइड/CO2 और पानी/H2O  बना देते है ।
स्वयं साफ होने वाले कपडों के फायदे :

Self Cleaning Sport Wear
❉धूप में खडे रहने से ये कपडें साफ हो जाते है, इसलिए कपडों की धुलाई का खर्चा कम हो जाएगा।


❉हवाई जहाज, स्पेश क्राफट में बैठे लोग बिना कपडें बदले लंबे समय तक अपना काम कर सकते है ।

❉जिन लोगों के पसीने के कारण कपडों-मोझों में से बदबू आती है, उनके लिए ये कपडें ज्यादा फायदेमंद है ।

❉डोक्टरो को आपने मास्क को बारबार साफ करने से मुक्ति मिल जाएगी ।

❉बार बार कपडे धोने से उसकी चमक कम हो जाती है, लेकिन स्वयं साफ होने वाले कपडों को बार धोना नहीं पडेगा इसके कारण ये कपडे लंबे समय तक नए जैसे बने रहेंगे ।

❉ये कपडे पानी प्रतिरोधी/water resistant होने के कारण ये पानी से जल्दी भीगते नहीं है । कॉफी, चाय, खाने के 
तेल या कीसी रंग का धब्बा इन पर नहीं पडता है ।
Self Cleaning Denim
Boundry :

छोटी चींकी ने ये पढके कहा,  "चलो अच्छा है... मम्मी बाहर धुप में खेलने में मना नहीं करेगी ।"

Saturday, 13 May 2017

Plastic Eating Worm Discovered || प्लास्टिक खाउ कीडे खोजे गए...

वैज्ञानिको ने प्लास्टिक खाने वाले एक कीडे /worm की खोज की है ।


QUARTZ 24 APRIL, 2017

ज्यादातर ये कीडा मछ्ली पकडने के चारे की तौर पर उपयोग होता है । ये कीडा मधुमख्खी के छ्त्ते का मॉम खाते है ।⅄

स्पेन के वैज्ञानिक फेडेरिक बेर्टोसीनी (Institute of Biomedicine and Biotechnology of Cantabria, Spain)ने सब से पहले इन कीडो की प्लास्टिक खाने की आदत को खोज था ।


ज्यादातर होतो है वैसे ही ये खोज एक अकस्मात का कारण हुइ । फेडरिक अपने घर पे रखे मधुमख्खी के छत्ते में से ये कीडे साफ कर रहे थे । उन्हों ने इन कीडों को एक प्लास्टिक बेग में भर दिया । लेकिन ये कीडे उस बेग में से छेद करके निकल गए ।

इस घटना पर खोज करते हुए 24 April, 2017 को उन्हों ने एक खोज पत्र "Current Biology" में प्रदर्शित किया है । इनके मुताबिक, 100 कीडे /wax worms एक पोलिथिन शोपिंग बेग को 40 मिनीट में खा सकते है । ज्यादातर खुले वातावरण में ये प्लास्टिक बेग को पूर्ण विघटित होने में 100 से 400 साल लगते है । जब की ये कीडे महज 40 मिनीट में उसे विघटित कर देते है ।


2011 में एक फूग/fungi की प्रजाति खोजी गई है, 2014 एक बैक्टेरिया की प्रजाति खोजी गई है । जो प्लास्टिक को विघटित कर सकती है । लेकिन ये कीडे इन सब से जल्दी प्लास्टिक को पचा सकते है । समस्या ये है की, ये कीडे जमीन मे अंदर फसे प्लास्टिक को खा नहीं सकते । जमीने के नीचे ऑक्सिजन स्तर कम है ।

लेकिन वैज्ञानिको ने इस का हल निकाल दिया है । ये कीडा जिस उत्सेचक /enzyme की मदद से प्लास्टिक को पचाता है, वैज्ञानिक उस उत्सेचक को लेबोरेटरी में बनाने की कोशिश करेंगे ।

कुछ सालों पहले, भारत में सुप्रिम कोर्ट ने कहा था, "हम प्लास्टिक टाईम बोम्ब पर बैठे है ।" 

एक सर्वे के मुताबिक, भारत में  60 बडे शहरों में हर रोज 15,000 टन प्लास्टिक का कूडा पैदा होता है । इस में ज्यादातर प्लास्टिक का पुन:उपयोग या रिसायक्लींग नहिं होता है । या तो ये जमीन में पडा रहता है या पानी के स्तोत्रो को प्रदुषित करता है ।

अब ये स्पेनीश वैज्ञानिक की खोज शायद प्लास्टिक प्रदूषण में मुक्ति दिला सकें । 

Friday, 12 May 2017

Climate Change || विशाल हिमशिला/Ice berge ऐन्टार्क्टिक से अलग हो जाएगी !!! समुद्र जलस्तर बढने का खतरा !!

Climate Change || विशाल हिमशिला/Ice berge ऐन्टार्क्टिक से अलग हो जाएगी !!! समुद्र जलस्तर बढने का खतरा !!

MIRROR 23 FEB, 2017
ऐन्टार्क्टिक  से लार्सन सी/ Larsen C नाम की एक विशाल हिमशिला करीबन अलग होने आई है । इस से पहेले के वर्षो मे हिमशाला तूट कर अलग होने की 10 घटनाए हो चूकि है । लेकिन इस बार की हिमशिला बहुत बडी है ।

प्रो. Adrian Luckman (Swansea University, Leader of Midas project) कहा, "पिछ्ले कुछ महिने से ये दरार स्थिर थी । लेकिन, डिसम्बर, 2016 के बाद ये दरार जल्दी से बढना शुरु हुई है । अब हिमशिला का 20 किमी जितना ही हिस्सा ऐन्टार्किटक से जुडा है ।"


ABS News ने हिमशिला के तूटने के लिए आबोहवा परिवर्तन को जिम्मेदार बताया है । वैज्ञानिके ने चिंता जताते हुए बताया है की, " इतनी बडी हिमशिला के तूटकर समुद्र में चले जाने से एन्टार्क्टिक के ग्लेशियर के पिगलने का दर बढ जाएगा । पृथ्वी का तापमान बढने से हिमशिलाएं पिगलेगी। जिससे समुद्रो का जलस्तर बढेगा ।"

See the video :

Tuesday, 24 June 2014

Earth's Changing Magnetism : पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र बदल रहा है ।

source : scinecedaily.org
"स्वार्म" सेटेलाइट सिस्टम के तीन उपग्रह को नवम्बर, 2013 को छोडा गया था । इन सेटेलाइट्स की मदद से पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के बदलाव को मापा जा सकता है ।

पिछ्ले 6 महिनों के संशोधन से यह पता चला है की पृथ्वी का चुंबकिय क्षेत्र घट रहा है । यह नाटकीय बदलाव पृथ्वी के उत्तर गोलार्ध में ज्यादा मापा गया है । पृथ्वी का उत्तर चुंबकीय ध्रुव उत्तर साइबेरीया की और खिसक रहा है । ESA संस्था ने यह संशोधन 9 जून 2014 को प्रसिद्ध किया है ।

पृथ्वी का चुंबकिय क्षेत्र घटने का कारण हमारें ग्रह के गर्भ में स्थित मेग़्मा (लावा) के प्रवाह में आंतरीक बदलाव है ।

गुलाबी स्पॉट चुंबकीय ध्रुव की ताजा स्थिति दर्शाता है ।
चुंबकिय क्षेत्र का महत्व : 

पृथ्वी का चुंबकिय क्षेत्र ब्रह्मांड से आते हुए कोस्मिक किरणों और विजभारित कणों की वर्षा से सजीवों को बचाता है । हमारे विद्युत जनरेटर,  इलेक्ट्रिक मोटर, GPS सिस्टम, सेटेलाईट सिस्टम जैसे उपकरण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से प्रभावित है । कुछ ऋतुप्रवासी पक्षी इसी चुंबकिय क्षेत्र के सहारे अपने लंबे प्रवास के बाद निश्चित स्थान पर पहोंच जाते है। अब पृथ्वी का चुंबकिय क्षेत्र घट रहा है और बदल रहा है । तो, निश्चित ही पृथ्वी के सजीव जीवने पे असर होगा ।

पुराने अग्निकृत खडको के अध्ययन से पता चला है की पृथ्वी का चुंबकिय क्षेत्र में बदलाव भूतकाल में भी दर्ज किया गया है ।

Sunday, 22 June 2014

Invisible cloaks : अद्रश्य चौगा !!

science : sciencedaily.org
KIT एक युरोप की बडी संशोधन संस्था है । उनके संशोधन मुख्य विषय ऊर्जा क्षेत्र है । वहां के संशोधको ने द्रव्य को अद्रश्य करने की दीशा में एक नई खोज की है ।

पदार्थ को अद्रश्य करने के लिए पिछले वर्षो में प्रयास हुए है । जादुगर चीजों को गुम करन के लिए द्रष्टि भ्रम का उपयोग करते है । कुछ संशोधक पदार्थ को प्रकाश, गर्मी और ध्वनि से छुपाने मे कामियाब हुए है, लेकिन एसे अद्रश्य पदार्थ को स्पर्श से महसूस किया जा सकता है ।

अद्रश्य पदार्थ - left side
KIT लेबोरेटरी के संशोधक ने एसे कपडा (cloak) तैयार किया है की जिससे अद्रश्य पदार्थ को स्पर्श को भी महसूस नहीं किया जा सकता । यह कपडा खास तरीके तैयार किया गया एक पोलीमर है । उसका आकार नलाकार (cylindrical) है । उसके बीच में पदार्थ को रख दीया जाय तो प्रकाश, गर्मी और ध्वनि का कोई असर नहीं होता है । उसके उपर रूई (कॉटन) को लपेट लिया जाए तो उसके स्पर्श को भी महसूस किया जा सकता नहीं है ।

फिलहाल, यह संशोधन छोटे पदार्थों के लिए उपयोग में लिया जाता है । लेकिन भविष्य में इसके कुछ नए उपयोग खोजे जा सकते है ।

Boundry :

बंटी : अगली परीक्षा में इसी कपडे से बने पेन्ट शर्ट पहन के जाऊंगा ।







Tuesday, 10 June 2014

"Brazuca" : Keeper's Ball : 'Brazuca' इस वर्ल्ड कप में अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करेगा

source : sciencedaily.org
Adelaide युनिवर्सिटी के भौतिक विज्ञानी 2014 FIFA वर्ल्ड कप के लिए बनाए गए नये बॉल  'Brazuca' को 'गोलकिपर का बॉल' बताते है । 







2010 के FIFA वर्ल्ड कप में "Jabulani" बॉल का उपयोग हुआ था । इस बोल पे हलकी धारीयां (grooves) थी । जिसके कारण बॉल हवा में  तैरते समय अपने आसपास हवा का तेज बहाव पैदा करता था । उस वजह से बॉल हवा में ज्यादा तेझ गति से आगे बढता था । लेकिन, इस कारण से बॉल अपने सीधे गतिपथ से विचलीत हो जाता था (swing) । जिससे गॉलकिपर बॉल को रोकने में कई बार गलतियां करते थे । कई लोग "Jabulani" बॉल को 'बीच बोल' (Beach Ball) भी कहते थे । 



'Brazuca' बॉल पर गहरी धारीयां बनाई गई है । जिससे बॉल के हवा में  तैरते समय उसके आसपास हवा का बहाव मध्यम रहता । इस कारण से बॉल अपने सीधे गतिपथ से विचलीत नहीं होता है । जिससे गॉलकिपर बॉल को रोकने का सही अंदाजा लगा सकता है।






फ़िफा वर्ल्ड कप में अब तक उपयोग  कीए फूटबॉल देखे...(नीचे तस्वीर में)

Wednesday, 4 June 2014

Blonde or Brunette : "बाल की खाल" बदलें...

source : times of  india, sciencedaily.org
एक संशोधन से पता चला है की, हमारे बालों का रंग सुनहरा पीला (blonde) या काला ब्राउन (brunette) हमारे जिनेटीक कॉड के एक अक्षर के परिवर्तन से बदला जा सकेगा।
केट पेरी -hollywood


संशोधक डेविड किंगस्ले (Howard Hughes Medical Institute-HHMI)ने मछलीयो की त्वचा, बाल, आँख के रंग के लक्षणों को नियंत्रण करने वाले जिनेटीक कॉड का पता लगा लिया है । डेविड ने इस प्रकार का संशोधन मनुष्य के जनीनिक बंधारण पर भी किया है ।



रंग बदलना कैसे संभव होगा ?

संशोधक डेविड किंगस्ले इस संशोधन को समझते हुए कहते है," मनुष्य के बाल का रंग सुनहरा पीला (blonde) या काला ब्राउन (brunette) होन या इसकी आंख के रंग में विविधता "रंग लक्षण" (pigment trait) के जिनेटिक कॉड  की विशेषता है। निश्चित जिनेटीक कॉड मानव जाति में खास लक्षण (trait) प्रदर्शित करता है । अगर जिनेटीक कॉड में थोडा भी बदलाव करे तो मनुष्य जाति में नया लक्षण प्रदर्शित होगा।"

अपनी बात को समजाते हुए डेविड बताते है की, "उत्तरीय युरोप के लोगों में सुनहरे पीले (blonde) बाल का लक्षण (trait) ज्यादा देखने को मिलता है । उनके DNA कॉड में KITLG प्रोटीन का कॉड इस लक्षण (trait) का नियंत्रण करता है ।


मनुष्य कें 23 जोड रंगसूत्रो में 12 नंबर की जोड के रंगसूत्र के KITLG प्रोटीन कॉड में बदलाव करके ब्राउन काले (brunette) बाल का लक्षण (trait) प्रदर्शित किया जा सकता है ।

KITLG प्रोटीन कॉड की शृंखला में  3,50,000 न्युक्लियोटाइड दूर एक न्युक्लियोटाइड में ऐडेनीन (Adenine) की जगह गुआनीन (guianine) दाखिल करने से ब्राउन काले (brunette) बाल का लक्षण (trait) 20% प्रदर्शित हो सकता है । "


यह बदलाव छोटा है लेकिन जीव विज्ञान के क्षेत्र में यह एक बडी उपलब्धी है । इस प्रकार के जिनेटीक कॉड बदलाव के प्रयोग चूहों पर किए गये है । जिनमें प्रयोगो में कुछ सफलता मिली है ।

Boundry :
कोलेजीयन कन्या बोलेगी "डोक्टर साहब ! प्लीज मेरे बाल पिन्क कलर के कर दो ! यह रहा मेरे जिनेटीक बायोडेटा...."

(यहां प्रदर्शित फोटो में कलाकारों के बाल "कलर डाई" किए हुए है ।)

Tuesday, 13 May 2014

Globel Warming : पश्चिम एन्टाकर्टिक का ग्लेशियर तूट चूका है, समुद्र जल स्तर बढने का खतरा

थ्वाइट्स ग्लेशियर (16 October, 2012)
Source : National Geographic
वैज्ञानिकोने चेतावनी दी है की पश्चिम एन्टाकर्टिक से थ्वाइट्स ग़्लेशियर तूट गया है। और अब उसके पिगलने से समुद्र में जल स्तर बढने का खतरा पेदा हो गया है।

वैज्ञानिको का अंदाजा था की, ये 2 माईल मोटा (3.2 km thick) ग्लेशियर अगले कुछ वर्षो तक एन्टाकर्टिक में रहेंगा। लेकिन पृथ्वी के बढतें तापमान (Globel warming) के कारण इस ग़्लेशियर की पिगलने की रफतार बढ गई है।

अगर ये ग्लेशियर पुरा पिगल जाता है तो पुरे विश्व में समुद्र जल स्तर 46 ईंच (60 cm) बढ सकता है। समुद्र जल स्तर में कुछ सेन्टिमीटर का बदलाव कई लोगो के लिए मुसिबत ला सकता है।  पुरा ग्लेशियर पिगलने में 200 से 900 साल समय लग सकता है। लेकिन Globel warming की तिव्रता और बर्फवर्षा का प्रमाण यह जल्दी या धीमा करेगा ।


इतिहास में ऐसे प्रमाण मिलते है की, गुजरात में श्री कृष्ण की द्वारिका नगरी, लोथल , धोलावीरा का नगर के डुबने का कारण भी यही था।

किस कारण से पश्चिम एन्टाकर्टिक का थ्वाइट्स ग़्लेशियर पिगलने लगा ? 


Globel Warming के कारण वैश्विक हवामान में बदलाव आया है। पवन की दिशा और समुद्रो के आंतरीक प्रवाह (under oceanic currents) में बदलाव के कारण पाइन आइलेन्ड में हर रोज 8 क्युबिक माइल गरम पानी आने लगा । जिससे यह थ्वाइट्स ग्लेशियर पिगलने लगा। फिर अभी तक इस घटना को विश्वनीय तरीके कोइ  समझा नहीं सकता है।

इयान जाउगीन (Ian Joughin, University of Wahshington) ने थ्वाइट्स ग्लेशियर के भौतिक फेरफारो का कम्प्युटर अध्ययन करके बताया है की, "थ्वाइट्स ग्लेशियर पिगलने के प्रारंभिक दोर में है। थ्वाइट्स ग्लेशियर का पिगलना "runaway process" है। अब उसे रोकने के प्रयास बिनअसरकारक है। लेकिन अब बाकी के पश्चिम एन्टाकर्टिक ग्लेशियर भी सुरक्षित नहीं है।"

Sunday, 11 May 2014

superbugs बैक्टीरिया के खिलाफ एंटीबायोटिक दवाएँ अप्रभावी, दुनियाभर में एक गंभीर और बढ़ता खतरा

गोनोरीया के बैक्टेरीया
Source : National Geographic
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की पहली वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार , -superbugs बैक्टीरिया का एंटीबायोटिक के सामने प्रतिरोध- दुनिया भर में एक गंभीर और बढ़ता खतरा है।

आज नवजात शिशुओं में संक्रमण, न्युमोनिया, मूत्र मार्ग में संक्रमण (infection) और सूजन (inflammation), हर रोज आंतों में संक्रमण (gestric problem) जैसे रोगों के लिए अब एंटीबायोटिक के बिना अन्य दवाइयां बिनअसरदार बनने लगी है।

स्टुअर्ट लेवी, (Tufts University School of Medicine, बोस्टन) Superbugs द्वारा उत्पन्न खतरों तथा एंटीबायोटिक्स का विवेकपूर्ण उपयोग के लिए समझते हुए National Geographic के साथ बात की ।

वास्तव में superbugs क्या हैं?

बैक्टीरियाने खुद को बचाने के लिए उत्क्रांति (evolution) से  एंटीबायोटिक को नष्ट करने की क्षमता हासिल कर ली है | बैक्टीरियाने पेनिसिलीन जैसे ब्रोड स्प्रेक्टम एंटीबायोटिक (ज्यादातर बैक्टेरिया को मारने के लिए उपयोग में आने वाला एंटीबायोटिक ) लिए प्रतिरोध के लिए एक जीन (genes, जनीन) विकसित किया है । जिसके कारण superbugs बैक्टीरिया एंटीबायोटिक दवाओं को निष्क्रिय करनेवाले एंजाइमों (उत्सेचक) बना सकता है या तो अपने शरीर पे से एसे स्थान दूर कर सकता है जहाँ पे एंटीबायोटिक आक्रमण करते है।

क्यों इन superbugs के प्रसार का खतरा बढ़ रहे हैं ?

हम बहोत ज्यादा एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग कर रहे हैं । आम सर्दी (common cold fever) एक वायरस से हो रही है । लेकिन डोक्टर एंटीबायोटिक देकर उसका उपचार कर रहे है। डोक्टरो को लगता सर्दी (common cold fever) में एंटीबायोटिक से काफी कारगत है, लेकिन वे हमारे शरीर में रहे बैक्टीरिया को एंटीबायोटिक प्रुफ बनाने में काम आती है।

गाय, भेंस, मुर्गी आदी पालतुं जानवरों में  एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग बहोत हो रहा है। ऐसे प्राणी के मल-मूत्र, शव से एंटीबायोटिक दवाओं जमीन और पानी में रहनेवाले बैक्टीरिया के संपर्क में आती है। जिसके कारण पर्यावरण में पायें जानेवालें ज्यादातर बैक्टीरिया एंटीबायोटिक प्रुफ बनने लगे है। इससे बैक्टीरिया आज superbugs बन गया है।

हम कैसे आगे superbugs के प्रसार का मुकाबला  कैसे कर सकते हैं ?

डोक्टर्स को ये समझना जरूरी है की जब जरूरत न हो तब एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग न करें। गाय,  भेंस, मुर्गी आदी पालतुं जानवरों में  एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग को बंध करें।

नये एंटीबायोटिक दवाओं को खोजने में ध्यान देना चाहिए । हालांकी वो काफी समय मांगने वाला काम है।

Thursday, 8 May 2014

વૈજ્ઞાનિકોએ સૌ પ્રથમ "એલિયન DNA" માંથી અર્ધ કૃત્રિમ કોષ બનાવ્યો.

Source : esciencenews.com
'નેચર' મેગેઝિનમાં પ્રસિદ્ધ થયેલા એક સંશોધન પત્ર અનુસાર, વૈજ્ઞાનિકોએ પૃથ્વી પર કોઈ સજીવમાં ન હોય (અર્થાત 'એલિયન') તેવા બિલકુલ જુદાં જ DNA કૉડની મદદથી સૌ પ્રથમ અર્ધ કૃત્રિમ કોષ બનાવ્યો.

આ અર્ધ સાંશ્લેષિત સૂક્ષ્મજીવ, હકીકતમાં ઈ. કોલી બેક્ટેરીયા છે. પણ, આ બેક્ટેરીયાના DNA કૉડમાં ચાર અક્ષર (A,T,C,G) ના પારંપરીક કૉડને બદલે છ અક્ષરનો DNA કૉડ હોય છે.

આ બેક્ટેરીયાના DNA કૉડમાં કૃત્રિમ છઠ્ઠી જોડને X અને Y કહે છે. આ વધારાની જોડ પર DNA કૉડ પણ અન્ય DNA કૉડ સાથે બંધ બેસતા હોય છે. 

સંશોધનકર્તાઓ એ નોંધ્યું છે કે, "આ બેક્ટેરીયા પણ અન્ય સજીવોની માફક વંશવૃદ્ધિ કરે છે. અન્ય સજીવોની માફક તેઓ પણ પોતાના DNA કૉડ વારસામાં  આપે છે. અલબત્ત, આ નવા DNA કૉડને લીધે બેક્ટેરીયામાં કોઈ નવા પ્રકારનું પ્રોટીન નિર્માણ થતું નથી. નવા DNA કૉડ બેક્ટેરીયાની ચયાપચય (metabolism)‌ ક્રિયાઓમાં કોઈ ભાગ નથી લેતાં," 

સંશોધકોનું સૈદ્ધાંતિક રીતે  માનવું છે કે, "નવા ઉમેરેલા DNA કૉડ વડે સજીવ કોષમાં 20 કરતાં વધારે એમિનો એસિડ પેદા થઈ શકશે. જેથી સજીવ કોષમાં નવા પ્રકારના પ્રોટીનનું નિર્માણ થશે."

HAPPY MOTHER'S DAY : मधर डॅ का इतिहास जाने

मधर डॅ का इतिहास :- प्राचीन समय में ग्रीकवासी क्रोनस की पत्नी और समग्र देवताओं की माता "रिहा" (Rhea)‌ को आदर देने के लिए मधर ड...