Tuesday, 27 May 2014

Nature Inspires Drones : छोटे 'ड्रोन' रोबोट



Source : Sciencedaily.com

ड्रोन विमान
अमेरिका का ड्रोन विमान अफगानिस्तान में अपने कारनामों के लिए सब जानते है। यह विमान बिना पाइलोट के उडता रहता है । उसका नियंत्रण जमीन पर स्थित एक कक्ष से किया जाता है । इस विमान में HD-कैमेरे लगे होते है । जिससे काफी ऊंचाई से भी साफ तस्वीरें ली जा सकती है ।

लेकिन, शहर के भीड-भाड वाले विस्तार में ड्रोन विमान का संचालन ठीक से नहीं हो पाता था । उसका कद भी बडा होने की वजह से नीची उडान में असफल रहते है ।

अब संशोधकोने कुदरत के छोटे सजीव से प्रेरणा लेते हुए इस समस्या हल ढुढने का प्रयास किया है ।

अलग अलग 14 संशोधक टीमोंने पक्षीओं, चमगादड, तीतली, मधुमख्खी जैसे प्राणी की शरीर रचना का
अध्यन करके छोटे उडनेवालें रोबोट बनाने का प्रोजेक्ट शुरू किया है । यह छोटे रोबोट शहरी भीड-भाड वालें विस्तारों से आराम से गुजर पायेंगे ।


रोबोट का महत्व :
जापान के अणुरिएक्टर के विस्फोट जैसी दुर्घटनाओं के समय यह रोबोट वहां भेजकर स्थिति का ब्योरा लिया जा सकता है । जासूसी के क्षेत्र में यह रोबोट ज्यादा काम में आ सकता है । इन रोबोट का अच्छा उपयोग ‘खोज अभियान’ और ‘बचाव अभियान’ में हो सकते है ।

23 May, 2014 को प्रदर्शित एक रिपोर्ट -Bioinspiration and Biomimetics-के अनुसार संशोधक टीमोंने अपने काम का प्रदर्शन किया। इस प्रकार के रोबोट्स हवा के तेज बहाव में स्थिर रहकर उड नहीं सकते । अभी रोबोटिक्स विज्ञान में काफी सुधार होने है । आशा रखते है की आने वाले सालों में छोटे – छोटे रोबोट्स सामान की डिलीवरी करते हुए हवा में उडते नजर आएगे ।

Monday, 26 May 2014

10 New Species of 2014 (part 2) : 2014 में खोजे गई 10 नई सजीव जाति

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(6) पश्चिमी ओस्ट्रेलिया के बरसाती जंगलो की छिपकली (Saltuarius eximius) - इसकी पूंछ फैली हुई होती है और उसके रंग की वजह से इन छिपकलीयों को आसानी से देखा नहीं जा सकता ।

(7) स्पेन के दक्षिणी समुद्र में पानी के नीचे गुफा में पाया गया एक कोषी जीव (protista) - जो बहुकोषी स्पोंज की नकल जैसा लगता है |


(8) स्पेश क्राफ्ट जहां पे बनते है वहां की फर्श पर पेदा होते हुए बैक्टेरिया की नई जाति (Tersicoccus phoenicis) यह संभव है, यह जाती स्पेश फ्राफ्ट के साथ अंतरिक्ष में भी पहोंच चुकी हो!

(9) कोस्टो रिको के जंगलो से मिली बेहद छोटी मधु मख्खी की जाति (Tinkerbella nana) इस मधुमख्खी की लंबाई 0.00984 ईंच है । यह अपने अंडे दुसरे किटकों के अ‍ॅंडो में छुपा देते है ।

(10) पश्चिमी क्रशिया के ल्युकिना जामा-ट्रोजामा गुफा में 3000 फीट जमीन के नीचे अंधी स्नेल (Zospeum tholossum) की जाती मिली है । जो 0.08 ईंच लंबी है । स्नेल की सामान्य जातियों के मुकाबले यह धीरे चलती है । एक सप्ताह में करीब 1 ईंच से भी कम !

Sunday, 25 May 2014

10 New Species of 2014 (part 1) : 2014 में खोजे गई 10 नई सजीव जाति

(1) इक्वाडोर का 'cute' ओलिंग्योटो
 (Bassaricyon neblina) यह 35 साल में सस्तन समुदाय में खोजी गई पहली नयी जाति है ।

(2) थाइलेन्ड का क्वीसाक ड्रेगन पेड ((Dracaena kaweesakii)) यह पेड 40 फीट ऊँचा है ।

(3) एंटाकर्टिका का एनड्रिल ऐनामोन यह 1 ईंच से छोटा सजीव अपना शरीर बर्फ में दबा के रखता है । आमतौर यह सजीव समुद्र पानी में ही पाए जाते है । एंटाकर्टिका में यह पहली बार पाए गए है ।

(4) सांटा कटलिना की गुफाओ से मिला दिखने में भयानक दिखनेवाला केकडा (Liropus minusculus) का कंकाल, इस जाती की मादा की लंबाई 1 ईंच का 1/10 और नर की लंबाई 1/8 होती है ।
(5) नारंगी पेनिसिलीयम फूग -

⇒⇒Remaining 5 will published soon... keep watching....

Friday, 23 May 2014

'LIVE' Supernova explosion : सुपरनोवा विस्फोट को live देखा गया

source : sciencedaily.com
ब्रह्मांड में 'वुल्फ-रायेट तारा' सबसे महाकाय होता है । हमारे सूर्य से यह तारा 20 गुना ज्यादा भारी होता है  और सूर्य से 5 गुना ज्यादा गर्म होता है ।ब्रह्मांड में ऐसे तारे कम दिखने को मिलते है । जिसके कारण खगोल वैज्ञानिको के पास इनके बारें में ज्यादा जानकारी नहीं थी।

iPTF प्रणाली :
लेकिन,   intermediate Palomar Transient Factory (iPTF)  की मदद से ब्रह्मांड के किसी भी कोनें में अगर कोई भी घटना होने वाली है तो तुरंत उसका अद्ययन किया जा सकता है ।  यह कम्प्युटर से संचालित प्रणाली पुरे ब्रह्मांड का ब्योरा रखती है । जहां भी कोई अजीब सी घटना होने की संभावना है तो तुरंत पृथ्वी पर स्थित नियंत्रण कक्ष को संकेत भेजती है ।
 
iPTF  प्रणाली की वजह से ही वैज्ञानिको को जानकारी मिली की, 360 लाख प्रकाश वर्ष दूर एक  'वुल्फ-रायेट तारा' प्रचंड सुपरनोवा - llb supernova - बन रहा है । iPTF  प्रणाली का उपयोग करते हुए विझमन इन्स्टियूट (ईजरायल) के वैज्ञानिक ने इस सुपरनोवा -2013cu  को उसके विस्फोट के कुछ घंटो के पहले ही देख लिया। उन्हों ने जमीन से टेलिस्कोप से इस तारें का 5.7 घंटो तक अद्ययन किया । और उसके विस्फोट के पश्चात 15 घंटो तक उसका अद्ययन किया ।

तारें की जन्म कुंडली :
(a) ब्रह्मांड में हाइड्रोजन गेस के बीच गुरुत्वीय आकर्षण होने पर तारा बनने का प्रारंभ हुआ
 (b), (c)  गुरुत्वीय आकर्षण प्रबल होने पर तारें के केन्द्रिय भाग में केन्द्रिय संलयन (nuclear fusion) प्रक्रिया शुरू होती है ।
 (d) गुरुत्वीय आकर्षण और बहारी उर्जा का दबाव संतुलित होने पर तारा चमकता है । हमारा सूर्य इस अवस्था में है ।
(e) गुरुत्वीय आकर्षण चालु रहता है मगर केन्द्रिय भाग में हाइड्रोजन गेस खत्म हो जाने के कारण असंतुलन पेदा होता है ।
(f) अंत हमारे सूर्य से बहोत बडे तारें में सुपरनोवा विस्फोट के साथ उपरी सतह दूर हो जाती है ।

'वुल्फ-रायेट तारा' और सुपरनोवा क्या है ?
सभी तारों में केन्द्रिय संलयन (nuclear fusion) प्रक्रिया से हाइड्रोजन परमाणु का हिलीयम में रूपांतर होता है । तारे में जितना ज्यादा हाइड्रोजन गेस होगा, उतना उसके केन्द्रिय भाग में गुरुत्वीय संकोचन ज्यादा होगा । उतनी केन्द्रिय संलयन प्रक्रिया तेज होगी ।
जब तारे के केंद्र में हाइड्रोजन गेस खत्म हो जाती है तो, कार्बन, ओक्सिजन, नियोन, सोडियम जैसे भारी तत्वो का संलयन शुरू होता है । तारें का केन्द्रिय भाग आर्यन का बन जाए तब तक यह प्रक्रिया चालु रहती है ।

अब भी केन्द्रिय भाग का गुरुत्वीय संकोचन चालु रहता है और अंत में प्रोटोन और इलेक्ट्रोन मिल जाते है । जिसके बाद तारे में विस्फोट हो जाता है । उस समय बहोत सारी ऊर्जा ब्रह्मांड में चारो तरफ बिखरती है । इस विस्फोट को 'सुपरनोवा' कहते है । हमारा सूर्य 100 साल में जितनी ऊर्जा फेंकता है उतनी ऊर्जा सुपरनोवा विस्फोट से प्रति सेकंड मुक्त होती है !! तारा सुपरनोवा के पहले जो अवस्था प्राप्त करता है उसे 'वुल्फ-रायेट तारा' कहते है । जिसमें सुपरनोवा विस्फोट से पहेले एक प्रकार का वायु प्रवाह देखने को मिलता है । जिसमें तारे से द्रव्य बहार बहने लगता है ।


iPTF  प्रणाली की वजह से इस प्रकार सुपरनोवा -2013cu का live अद्ययन हो पाया है । iPTF  प्रणाली की मदद से अब ब्रह्मांड की कई घटनाओं को live देख पायेंगे ।

Wednesday, 21 May 2014

Self Clean Car : एक खुशखबर : 'सुपर आलसी' लोगों के लिए :"अब कार अपने आप ही साफ हो जाएगी।"

left side-सादा रंग;
right side-सुपर हाइड्रोफोबिक रंग
source : cbc.ca
NISSAN कंपनीने अपने एक प्रयोग में एक कार के आधे भाग को सादे रंग (paint) से और बाकी के आधे भाग को 'सुपर हाइड्रोफोबिक' (जलविरागी = जल के प्रति अनाकर्षित होने वाला) रंग से रंग दिया। इस कार को बरसाती ऋतु के माहोल में चलाया गया । तो जैसे हम फोटो में देख रहे है, ठीक वैसे ही जिस भाग पर सुपर हाइड्रोफोबिक रंग लगा है वो भाग साफसुथरा रहा। जबकी, सादे रंग वाला बाकी आधा भाग ज्यादा गंदा हो गया।

वैसे तो, सुपर हाइड्रोफोबिक रंग को 1977 में बनाया गया था । लेकिन उसका व्यापारीक उपयोग नहीं खोजा गया था । करीब एक साल से वैज्ञानिक इस रंग के व्यापारीक उपयोग के बारें प्रयोग कर रहे थे ।

कमल के पत्ते पर पानी के बिन्दु
सुपर हाइड्रोफोबिक 
रंग की सतह पर पानी के बिंदु
सुपर हाइड्रोफोबिक रंग :-
Nanex कंपनी के क्लाटोन बर्ग (Clayton Berg, Belgian-Canadian) ने कमल (Lotus) की पत्तियों का अध्ययन करके 'सुपर हाइड्रोफोबिक रंग' बनाया है । यह रंग को बनाने में नेनोटेक्नोलोजी का उपयोग हुआ है । 
 (b) सतह से सरकता पानी अपने
साथ कचरा भी ले जाता है।

इस रंग के तंतु (fibers) बहोत नजदीक होते है। जिससे पानी-धूल के कण उसके भीतर घूस नहीं पाते । कमल के पत्ते पर जैसे पानी के बिन्दु बन जाते है । वैसे ही इस रंग की सतह पानी के बिन्दु बन जाते है और  तेज हवा से कार की सतह पर सरकते हुए अपने साथ धूल-मिट्टी भी ले जाते है । इस तरह कार अपने आप साफ-self clean-हो जाती है ।

हालांकी, NISSAN कंपनी ने अपनी कोई भी नई कार पर इस रंग को लगाने की बात नहीं की है । फिर भी, अब वो दीन दूर नहीं NISSAN कंपनी अपनी नई कार में ग्राहको को 'सुपर हाइड्रोफोबिक रंग' का विकल्प देगी । इस रंग का उपयोग अन्य चीज-वस्तुओं - कपडें, फर्निचर - में भी किया जा सकता है ।

Tuesday, 20 May 2014

After 80 years "Light turns into Matter" : प्रकाश का पदार्थ में रुपांतर संभव हुआ...80 साल बाद

source : Times of India


जी. ब्रेईट और जॉन ऐ व्हिलर ने प्रकाश का द्रव्य में रूपांतर करने का सिद्धांत 1934 में दिया था।

"प्रकाश के दो कण (फोटोन) को एक दुसरे से टकराया जाए तो उनका इलेक्ट्रोन और पोझिट्रोन में रुपांतर हो जाएगा।"
लेकिन, इसका प्रायोगिक तौर पर कभी पृथक्करण नहीं हो सका। इस प्रयोग को संपन्न करने के शक्तिशाली कण प्रवेगक (पार्टिकल एक्लेरेटर) चाहिए।

2014 में लंडन में स्थित इम्पेरियल कोलेज की 'ब्लेकेट फिजिक्स लेबोरेटरी' में यह प्रयोग किया गया है। इससे जी. ब्रेईट और जॉन ऐ व्हिलर के सिद्धांत को अनुमोदन मिला है।

प्रयोग का महत्व:

इस प्रयोग से ब्रह्मांड की उत्पत्ति के शुरूआत के 100 सेकन्डस का चित्र स्पष्ट किया जा सकेगा। बिग बेंग के बाद कैसे यह द्रव्य स्वरूप ब्रह्मांड बना ? इस प्रश्न का उत्तर यह प्रयोग दे पायेगा।

प्रयोग कैसे किया गया ?

प्रथम  चरण :
वैज्ञानिको ने  शक्तिशाली लेसर किरणों से इलेक्ट्रोन्स को प्रकाश गति (3× 108 m/s) के जितना प्रवेगित किया । इन इलेक्ट्रोन्स को सोने (Au, Gold) पर फेंका गया । जिससे अति शक्तिशाली फोटोन (हमारे दृश्यप्रकाश से लाखो गुना!!) का बीम मिलता है ।

द्वितीय चरण:
अब सोने (Au, Gold) के प्याले जैसे पात्र में अंदर की ओर -Hohlraum (German शब्द, 'गुहा')- शक्तिशाली लेसर बीम फेंका जाता है। जिससे तारों में बनता है वैसा ही 'उष्मीय क्षेत्र' बनता है। जिसमें से भी फोटोन निकलते है।(जैसे गरम लोहों से लाल प्रकाश निकलता है!!)

पहेले चरण के फोटोन को इन दूसरे चरण के फोटोन की दिशा में भेजा जाता है । दोनों के टकराने  से इलेक्ट्रोन और पोझिट्रोन पेदा होते है।

प्रो. स्टीव रोझ (इम्पेरियल कोलेज, लंडन) ने बताया की- 'इस प्रयोग से 80 साल पहेले के सिद्धांत को प्रायोगिक सहमति मिली है।  और उच्च ऊर्जा वाले भौतिक प्रयोगो के लिए नई दिशा खुल गई है।'

Monday, 19 May 2014

Red spot of JUPITER will disappear: गुरु ग्रह का लाल धब्बा गायब हो रहा है!!?


source : www.cbc.ca
लाल धब्बे वाला (Red spot) ग्रह अगर पूछा जाए तो ज्यादातर लोगो का जबाब होगा "गुरू (Jupiter)"

लेकिन , रिसर्च से पता चला है की गुरू का ये लाल धब्बा धीरे-धीरे सिकुड रहा है।

गुरू ग्रह पृथ्वी से 11.2 गुना बडा है। हमारे सौर मंडल का सबसे बडा ग्रह है। खगोल वैज्ञानिको के लिए गुरू का 'लाल धब्बा (Red spot)' एक पहेली (mysterious puzzle) के समान है। जब वोयेजर-1 यान  गुरू के पास से गुजरा तब इस लाल धब्बे का रहस्य सुलझा।

Voyager -1
Red Gaint spot 
(magnified view)

ये लाल धब्बा (Red spot) एक तूफान है, जो 300 से अधिक साल से गुरू के वातावरण में घूम रहा है। गुरू ग़्रह पर 2% जितनी ही जमीन है । इस कारण इस तूफान का जोर अब तक कम नहीं हुआ है। इस की रफ्तार करीब 200 माईल प्रति घंटा है।

1995,2009,2014 में
हबल टेलिस्कोप से ली गई तस्वीरें
1800 में इस का कद (dimension) 41,000 किमी जितना था । (हमारे पृथ्वी के जितने 2-3 ग्रह इसमे समा सकते है!!!)
लेकिन, 2014 में इसका कद 16,500 किमी का ही रह गया है। इस का मतलब यह लाल धब्बा (Red spot) 900 किमी प्रति वर्ष की रफ्तार से  घट रहा है।

मिसेल वोंग (Micheal Wong, Scientist, University of California) बताते है की, "सभी खगोल वैज्ञानिकों के लिए लाल धब्बे (Red spot) का सिकुडना एक रहस्यमय घटना है। अगर इस रफ्तार यह घटना चालु रही तो अगले 17 साल में लाल धब्बा (Red spot) पुरी तरह गायब हो जाएगा।"

HAPPY MOTHER'S DAY : मधर डॅ का इतिहास जाने

मधर डॅ का इतिहास :- प्राचीन समय में ग्रीकवासी क्रोनस की पत्नी और समग्र देवताओं की माता "रिहा" (Rhea)‌ को आदर देने के लिए मधर ड...